Following is poem on attack in Delhi yesterday evening for your consideration for publication in your esteemed media.
Regards Dr. SK Mittal

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On Sep 14, 2008, Dr.MITTAL SK wrote:


Following is poem on attack in Delhi yesterday evening for your consideration for publication in your esteemed media.
Regards
Dr. SK Mittal


आज फिर चला पटाखा

आज हिमाले की चोटी से फिर किसी ने पुकारा है
आतंकवाद के नाम पे पडोसी ने ललकारा है

पूरब पश्चिम उतर दखिन घूम दिल्ली में फिर पधारा है
भारत के सपूतों ने इस चुनौती को स्वीकारा है

नफरत के सौदागरों को चेतावनी का संदेश भिजवाया है
तू कुछ भी करले हिंद-कश्मीर हमारा है
संदेश / चेतावनी नसीहत /सलाह
६० साल की आजादी में तुने मासूमों पर कहर बरपाया है
हम ने मुहतोड़ जवाब दिया और हर जगह तुझे हराया है

खेमकरण और कारगिल के संग्राम की पिटाई भूल गया है
संसद
में तेरी मौत जम्मू में तेरे कब्रिस्तान याद कराना पड़ रहा है

शायद खावायिश लालकिले पे चाय पीने की अभी भुला नहीं तू
शास्त्री
के जय जवान के नारे की मार को आज भी याद कर तू

राम कृष्ण गौतम गाँधी तिलक जवाहर के हम वंशज हैं जानले
सर पे कफ़न माथे पे तिलक, कमर बांधे तैयार है हिंदकी सेना मानले
हमने विश्व को मानवता का सन्देश दिया
पंचशील
और सद्भावना को माना और जिया

मजहबों
से परे जा हर कौम को आदर दिया
इस
देश में हर धर्म और मजहब ने प्यार अमन को जिया

हमने विश्व से आतंक ख़त्म करने का अहद लिया है
बंग
बंधुओं से, अफगानों से, पूछ हमने क्या क्या नहीं किया है

हमें लाहौर शांती की रेल भेजना आता है
तू
अगर पीठ पर छुरा घोंपे तो कारगिल भी करना आता है

और सुन : तेरे मुल्क में जमुरिय्त फिर से दस्तक दे रही है
बेनजीर को लुटा के इंसानियत भी रो रही है है

सात
समुन्द्र दूर बैठा तेरा आका आज तुझे जान गया
हम हमला करें ना करें विश्व का थानेदार तो डंडा तान चूका

कुरान-हदीस के पाक फतवों को भुला कुफ्र की बादशाहत कर रहा है
अपनों
को भड़का के तू उन्हें क्यों नापाक कर रहा है


तेरे मुल्क में जमुरियत फिर से दस्तक दे रही है
बेनजीर को लुटा के इंसानियत भी रो रही है है

दुनिया कहाँ से कहाँ तरक्की कर गयी तू भी इसे जान ले
झूट बोलना भीख मांगना आतंक बोना लाशे काटना है गलत मान ले

रमजान
के पाक महिने में सिजदा कर कफर से तौबा मांग ले
छोड़
दे यह ओछी हरकते विनाश की,तरक्की की डगर थाम ले

मत
ले सब्र का इम्तहान हमारा नहीं तो तू पछतायेगा
कसम
उस पाकपरवरदिगार की
हम
उठ गए तो तुझे कौन बचायेगा

भारत
वासियों इस घडी में ना घबराना
पूरा देश तुम्हारे साथ है आतंकियों को है सबक सिखाना

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